लगता है सरकार ने गरीबी को नहीं गरीबों को ही मिटा देने की ठान ली है तभी तो वॉल मार्ट जैसे मल्तीनेस्नल कम्पनी को लूट की खुली छूट के लिए आमंत्रित कर रही है की वो हमारे देश में आकर हमारे ही छोटे व्यापारियों को रौंद डाले। बड़े बड़े मॉलों में कपडे लत्ते से लेकर, आटा, चावल, दाल, सब्जी सब मिले ताकि न तो दुकानों का कोई अस्तित्व रह जाए और न ही हाट बाज़ारों का। ज़रा सोचिये अभी आपको अगर छोटी चीज़ की ज़रुरत होती है तो आप फट से पास की दुकान से ले आते हो अगर पगार न मिली हो या पैसे ghat गए तो उसके यहाँ आपका खाता भी चलता होगा अगर वही दुकान बंद हो जाए और आपको छोटी मोती चीज़ों के लिए भी मॉल जाना पड़े तो कैसा लगेगा। मॉल की पहली खामी आप वहाँ जाके चीज़ों का मोल भाव नहीं कर सकते। पता चला आप लेने तो राशन गए थे पर साथ ही बाजू में टंगी एक शर्ट पे दिल आ गया तो वो भी खरीद लाये, तो हो गयी न जेब ढीली, बिगड़ गया न आपका बजट? सब्जी मंडियों में ढेरों सब्जियां होती हैं एक जगह कुछ नहीं अच्छा लगा या दाम जियादा लगा तो दूसरी जगह से ले लिया पर मॉल में आपको यह सुविधा कहाँ मिलेगी वहाँ तो जो है वही खरीदना पड़ेगा और जब वहाँ से खरीद रहे हो तो मॉल में ऐसी में मज़े से सब्जी खरीदने का चार्ज भी आपको ही देना पड़ेगा।
ज़रा सोचो आपको और हमें तो तकलीफ होगी ही साथ ही उन दुकानदारों का क्या, उन व्यापारियों का क्या जिनकी रोज़ी रोटी इससे चलती है ना जाने कितने लोग बेरोजगार हो जायेंगे। पहले ही बेरोज़गारी कम है क्या ऊपर से महंगाई ने कमर तोड़ रक्खी है। अब ऐसे में आदमी अपना पेट पालने के लिए चोरी डकैती, लूट पात करने लिए तो मजबूर होगा ही न क्राइम रेट तो बढेगा ही। क्या होगा अगर देश में एमेंसीज़ का बोल बाला होता है तो कुछ लिखने की कोशिश की है वक़्त निकाल के ज़रूओर पढियेगा।
छोटे छोटे व्यापारियों का तय है बंटाधार
राज करेंगी एमेंसीज , रोयेगा दुकानदार।
हाट दुकान नहीं होगी, न दिखेंगे फिर बाज़ार
बड़े मॉलों से खरीददारी को होंगे हम लाचार ।
फिक्स दाम पे मोल तोल का नहीं कोई आसार
डेबिट कार्ड बिना तो भैया भूल ही जाओ उधार।